मध्यप्रदेश के नेशनल पार्क बांधवगढ़ में 22 नवम्बर को जब कठार से बाघिन को ट्रंकलाइज् करके लाया गया था तभी उसकी हालात ख़राब हो गई थी और फिर इनक्लोजर के भीतर बाघिन की मौत हो गई थी . दरअसल बाघिन को ट्रंकुलाइज करने में जिस इंजेक्सन का इस्तेमाल किया गया उसमें दवा की मात्रा अधिक होने की वजह से बाघिन की मौत हो गई.लेकिन पार्क प्रबंधन ने अपनी लापरवाही को छिपाने के लिए मामले को दबाये रखा।
#फ़िल्मीकहानी .......
अब मंगलवार की सुबह पार्क प्रबंधन ने बताया की एक दूसरा बाघ पंद्रह फिट ऊंची जाली की दीवार फांदकर इनक्लोजर में घुसा जहाँ बाघिन के साथ फाइटिंग कर उसे मार दिया और फिर पंद्रह फिट ऊंची जाली फांदकर बाघ फरार हो गया।
*कहानी कुछ ज्यादा फ़िल्मी लग रही है।