1. आखिरकार आजादी के 68 साल बाद भी आम आदमी को निश्चित समयावधि में न्याय क्यों नहीं मिलता ?
2. देश में व्याप्त भ्रष्टाचार और कालाधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की कोई जवाबदेही क्यों नहीं है ?
3. इस देश में यदि आम नागरिक कोई गुनाह करता है तो उसे 3 साल के अन्दर सजा हो जाती है वही जब कोई नेता गुनाह करता है तो उसे तारीख पर तारीख मिलती है, नेता खुद मर जाता है लेकिन भारत का कानून उसे सजा नही दे पाता| क्या इस पर सुप्रीमकोर्ट की कोई जवाबदेही नही बनती ?
4. सुप्रीम कोर्ट ने आज तक लोकपाल कानून देश में क्यों नहीं लागू करवा पाया ?
5. इस देश में कार अपने आप आम नागरिकों पर चढ़ कर आम नागरिकों का क़त्ल कर देती है, क्या इस पर सुप्रीमकोर्ट की कोई जवाबदेही नही बनती ?
6. इस देश में एक जानवर खुद को गोली मारकर आत्म हत्या कर लेता है, क्या इस पर सुप्रीमकोर्ट की कोई जवाबदेही नही बनती ?
7. इस देश में न्याय की आश में आम नागरिक मर जाता है, उसे न्याय तो दूर की बात है, तारीख भी नही मिलती है, क्या इस पर सुप्रीमकोर्ट की कोई जवाबदेही नही बनती ?
8. देश के अधिकतर न्यायालयों में पदासीन जज लाखों -करोड़ों रुपये लेकर भ्रष्ट नेताओं, ब्लातकारियों और हत्यारों के पक्ष में फैसला देकर उन्हें बरी करते हैं और फांसी पर लटकता है तो एक बेक़सूर आम आदमी l क्यों?
9. इस देश में भ्रष्टाचारी यदि 1 करोड़ रूपये कमाता है तो इस देश का कानून उस पर 7 लाख रूपये का जुर्माना लगाती है, बाकि रुपया उस भ्रष्टाचारी की जेब में चला जाता है | क्या इस पर सुप्रीमकोर्ट की कोई जवाबदेही नही बनती ?