तलेन गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के विजयादशमी उत्सव को लेकर नगर तलेन में पथ संचलन निकाला गया । पथ संचालन सरस्वती शिशु विद्या मंदिर प्रांगण से घोष के साथ प्रारंभ हुआ पथ संचलन नगर के विभिन्न मोहल्लों के मार्गो से होकर गुजरा इस दौरान पथ संचालन का नगर में जगह-जगह पुष्प वर्ष कर स्वागत किया गया। पथ संचलन नगर के विभिन्न मार्गो से होते हुए पुनः सरस्वती विद्या मंदिर प्रांगण पहुंचा जहां पर कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि समाजसेवी व सेवानिवृत शिक्षक जगदीश प्रसाद यादव, मुख्य वक्ता राजगढ़ विभाग के विभाग प्रचार प्रमुख डॉक्टर विवेक सोनी , नगर कार्यवाह रामकृष्ण यादव द्वारा शस्त्र पूजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉक्टर श्री सोनी ने विजयादशमी उत्सव ,आरएसएस की स्थापना एवं उसके क्रियाकलापों के बारे में विस्तार से बताया उन्होंने कहा कि आज के दिन भगवान प्रभु श्री राम ने आततायी ,अपराध और अधर्म के प्रतीक का रावण वध किया था उसी वध को हम विजयादशमी के रूप में मनाते हैं तो प्रश्न यह उठता है कि सनातन धर्म, हिंदू समाज पेड़ों की पूजा करता है चींटियों को आटा देता है । ऐसा संवेदनाशील समाज किसी के वध को उत्सव के रूप में क्यों मनाता है। तो यही हिंदुत्व की है हिंदुत्व यानी परिवार ,समाज, राष्ट्र ,मानवता और नीति पर जो भी संकट आए उसके प्रतीक को उसके कारण को समूल रूप से नष्ट कर देना यही हिंन्दुत्व है। आज और एक अति विशिष्ट दिन है समय के पन्नों पर इतिहास की स्मृतियों में और मानव जाति के उत्थान के अति विशिष्ट कालखंड के रूप में इसे स्वर्णिम दिवस के रूप में याद किया जाता है और वह है राष्ट्रीय स्वयंसेवक की स्थापना का दिन और स्थापना के 100 वर्ष की विजयादशमी। इस 100 वर्ष की यात्रा के पीछे के केवल एक व्यक्ति की ध्येयनिष्ट आजीवन अनवरत घनघोर तपस्या है और वहा व्यक्ति है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक परम पूज्य आद्य सरसंघचालक डॉक्टर केशव बलिराम पंत हेडगेवार। डॉक्टर जी की कल्पना थी कि व्यक्ति निर्माण से समाज संगठित होता है और संगठित समाज ही परम वैभवशाली राष्ट्र का कारक बनता है परम वैभवशाली राष्ट्रीय यानी समृद्ध ,सुरक्षित , सुशिक्षित, सुसंस्कृत और हष्ट-पुष्ट शरीर , और स्वस्थ बुद्धि से सोचने वाला व्यक्ति । साथ ही डॉक्टर सोनी ने कहा कि संघ ने 100 वर्ष जो कार्य व्यक्ति परिवार समाज राष्ट्र निर्माण के लिए किए उनका सार पंच परिवर्तन है कुटुंब प्रबोधन, समरसता , स्वदेशी ,पर्यावरण, और नागरिक शिष्टाचार । 100 वर्षों की यात्रा का सार पंच परिवर्तन से परम वैभव है। कार्यक्रम के अंत में संघ की प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
संघ के शताब्दी वर्ष पर तलेन में निकाला गया पथ संचलन जगह-जगह पुष्प वर्षा कर हुआ स्वागत