नर्मदा नदी के प्रति श्रद्धा को व्यक्त कर क्रियान्वित करें :- कलेक्टर श्री लवानिया नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा की कार्यशाला सम्पन्न होशंगाबाद/14,दिसम्बर,2016/ नर्मदा नदी का आध्यात्मिक महत्व है वो पवित्र नदी है। मां नर्मदा औषधी गुणो से भरपूर व पवित्र नदी है। कई बार हमारे मन में जल संरक्षण की बात आती है। किंतु हम उसे कार्य रूप में परिणित नही कर पाते है। अत: अब अवसर आ गया है कि हम उसके जल का संरक्षण कर पर्यावरण की रक्षा कर अपने कर्तव्यो का निवर्हन करें उक्त बात बुधवार को नर्मदापुरम् संभाग कमिश्नर श्री उमाकांत उमराव ने नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा की कार्यशाला में कही। कार्यशाला में होशंगाबाद जिले के 58 गांव के सरपंच व सचिव, जनपद पंचायत के सदस्यगण, अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण मौजूद थे। कमिश्नर श्री उमराव ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि नर्मदा मां का जल भी गंगा नदी की तरह ही पवित्र है क्योंकि उसमें कई औषधी गुण भी मौजूद है। उन्होने कहां कि आज से 30 वर्ष पूर्व नर्मदा में पानी बहुत था उसका प्रवाह तेज था, किंतु धीरे-धीरे पानी कम हो गया है अत: हम नर्मदा को पुन: पुराने स्वरूप में लाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में पौधरोपण करे, पौधरोपण करने से मिट्टी का कटाव रूकता है, और जल संरक्षण भी होता है। पौधरोपण करने से पौधो की जडो से पानी नदी के अंदर जाएगा जो नदी को जीवित करने का कार्य करेगा। श्री उमराव ने कहा कि हमने कुंओ व नलकूलो के जरिए नर्मदा नदी का पानी खिंच लिया है इसलिए नदी का जल स्तर घट गया है। पहले नर्मदा स्वयं का शुद्धीकरण कर लेती थी, क्योंकि उसके पास डायजेस्ट करने की क्षमता थी, आस पास पौधे थे, मछलियां थी जो तल को साफ करने का कार्य करती थी, साथ ही आक्सीजन भी पर्याप्त मात्रा में थी जो इसे शुद्ध रखने का कार्य करती थी। कमिश्नर ने कहा कि हमें नर्मदा नदी के दोनो किनारों की ओर 1-1 कि.मी. पर पौधरोपण करने होंगे और पूर्व की तरह घास भी लगानी होगी तभी हम इसका संरक्षण कर पाएगें। श्री उमराव ने बताया कि नर्मदा नदी के रिपेयरिंग जोन को चिन्हित कर स्वैच्छिक संगठनो की मदद से पौधरोपण किए जाएगे एवं रिपेयरिंग जोनो को पुर्नजीवित किया जाएगा। इस कार्य में विशेषज्ञों की भी सेवाएं ली जाएगी। कमिश्नर ने बताया कि किसानो को पौधरोपण का महत्व समझाने के लिए आत्मा परियोजना द्वारा किसानो को प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। साथ ही किसानो को शून्य बजट पर खेती करने का प्रशिक्षण की दिया जाएगा। किसानो को समझाइश दी जाएगी कि वे अपने खेतो में रासायनिक खाद्य का उपयोग बंद कर देवे। कलेक्टर श्री अविनाश लवानिया ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि नर्मदा नदी के प्रति हमारे मन में जो श्रद्धा है उसे कार्य रूप में परिणित करने का समय आ गया है। उन्होने पौधरोपण पर शासन से मिलने वाले अनुदान की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि यदि नर्मदा नदी के दोनो किनारो पर किसान 1-1 हैक्टेयर स्वयं की भूमि पर फलदार वृक्ष लगाते है तो पहले वर्ष उन्हें 24 हजार व दूसरे व तीसरे वर्ष 8-8 हजार रूपये का अनुदान दिया जाएगा जो किसानो के बैंक खातो में जमा कर दिया जाएगा इसके अलावा 3 वर्षो में 20-20 हजार का अनुदान में शासन द्वारा दिया जाएगा। कलेक्टर ने कहा कि सचिव सरपंच का यह दायित्व है कि वो इस योजना का लाभ उठाते हुए ग्रामीणो को पौधरोपण करने के लिए प्रेरित करें। उन्होने कहा कि उन सरपंचो एवं सचिव के विरूध कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी जो शासन की इस योजना का लाभ गांव वालो तक पहुंचा नही पाएगे। कलेक्टर ने कहा कि नर्मदा नदी के किनारे के गांव के लोगो को इस योजना की जानकारी होनी चाहिए। श्री लवानिया ने स्पष्ट रूप से बताया कि अनुदान की राशि शासन भूमि मालिक को ही देगा यदि कोई सिकमी कर रहा है तो उसे अनुदान राशि नही दी जाएगी, उन्होने बताया कि पौधरोपण से पूर्व ही बाढ प्रभावित क्षैत्र चिन्हित कर लिए जाएगें ऐसी जगह जो डूब क्षैत्र है वहां पौधरोपण नही किया जाएगा। जन अभियान परिषद के जिला संयोजक श्री कौशलैष तिवारी ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि उनकी टीम नर्मदा के किनारे के रिपेयरिंग जोन को चिन्हित कर वहां पौधरोपण सुनिश्चित करवांएगी। बरकुतउल्ला विश्व विद्यालय के प्रो. विपिन व्यास ने नर्मदा नदी की महत्ता की जानकारी देते हुए बताया कि यदि हम नर्मदा नदी के केचमेट एरिया को संरक्षित कर लेगे तो नदी भी संरक्षित हो जाएगी, नदी की छोटी-छोटी धाराओं से भी हम नदी का संरक्षण कर सकते है। पहले धारा के तेज प्रवाह के कारण नदी के बैकटरियां की सफाई हो जाती थी, हमें नदी की धारा के प्रवाह को बनाए रखना होगा, साथ ही नर्मदा की सहायक नदियो को भी जीवित करना होगा, नदी के किनारो पर कदम, जामुन, बेर के वृक्ष लगाने होगे। प्रो. व्यास ने अवगत कराया कि नदी मे जलीय जीवो की उपस्थिति भी महत्वपूर्ण है। उन्होने बताया कि पूर्व में नर्मदा में 77 प्रकार की मछलियां पाई जाती थी जो घटकर अब 52 प्रकार की ही शेष रह गई है। सहायक संचालक उद्यानिकी डां नेहा पटेल ने बताया कि पौधरोपण के साथ-साथ किसानो की आय को दुगुना करने का भी प्रयास किया जाएगा, मिट्टी का कटाव रोकना व जल संरक्षण पहली प्राथमिकता है। जिले में यात्रा के दौरान आम, अमरूद, नीबू, संतरा के पौधे लगाए जाएगें। उन्होने बताया कि 1 हैक्टेयर में 100 पौधे लगाए जा सकते है। कार्यशाला में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री कुशल पटेल, उपाध्यक्ष श्री शंभुसिंह भाटी, जनपद पंचायत होशंगाबाद की अध्यक्ष श्रीमती संगीता सोलंकी, जनपद पंचायत बाबई के अध्यक्ष श्री ब्राजमोहन मीना, जनपद पंचायत के सदस्यगण, जन अभियान परिषद के पदाधिकारीगण, सी.ई.ओ. जिला पंचायत श्री पी.सी. शर्मा, अपर कलेक्टर श्री राजेश राठौर आदि मौजूद थे।