प्रायः देखने में आता है कि लोग शनि को क्रूर पीड़ा देने वाला अमंगलकारी अशांत दुख देने वाला सुख और संपत्ति का नाश करने वाला देवता समझते हैं परंतु ऐसा कदापि नहीं है, यथार्थ में शनि अत्यंत गंभीर, कूटनीतिज्ञ, तपस्वी, त्यागी, हटी और क्रोधी तथा न्याय प्रिय देवता है l यह लोगों के कर्मानुसार अच्छा और बुरा फल प्रदान करते हैं l व्यक्ति अज्ञानतावश यदि कोई पापिष्ट कर्म में रत रह चुका है और ज्ञात होने पर यदि वह शनि देव से क्षमा याचना करता है और भविष्य में अच्छे कर्मों में रत रहने का संकल्प करता है तो उसे शनि देव द्वारा क्षमा अवश्य प्राप्त होती है l लोगों को भ्रमित करने और डराने के नाम पर ही शनि को बुरा ग्रह बताकर उसे बदनाम किया गया है जबकि असलियत इसके ठीक विपरीत है शनि देव का संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है:-

शनि देव के 10 नाम -  पिंगल, कृष्णा, छाया नंदन, वभ्रू , कोणस्थ, रौद्र,सौरी, दुखभंजन, मंद , शनि 

पिता -सूर्यदेव, माता -छाया, भाई- यमराज, बहन- यमुना, गुरु- भगवान शिव, ईस्ट- भगवान कृष्ण, आराध्य -हनुमान जी, रंग -कृष्ण वर्ण, रुचि- आध्यात्म, कानून राजनीति, कार्यक्षेत्र- न्याय एवं कर्म प्रियराशि -कुंभ एवं मकर, अधिपति -रात्रि, नक्षत्र -अनुराधा, पुष्य, उत्तरा ,प्रियरत्न -नीलम, प्रियधातु -लोहा

व्यापार उद्योग पर नियंत्रण -  पेट्रोलियम पदार्थ मशीन निर्माण और मरम्मत ट्रांसपोर्ट का कार्य हार्डवेयर सीमेंट कोयला लोहा इस्पात आदि

प्रिय वस्तुएं - तिल , सरसों का तेल, उड़द, काले रंग के पदार्थ, काला कपड़ा, कसैला, खट्टा पदार्थ

प्रभावपूर्ण समय -  साढ़े सात वर्ष महादशा - १९ वर्ष 

शनि की साढ़े साती -  भारतीय ज्योतिष के मतानुसार ब्रह्मांड में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु, नौ ग्रह है प्रत्येक ग्रह का स्वभाव ,गति, प्रभाव, गुण दोष एक दूसरे से भिन्न है l ज्योतिष के मतानुसार 12 राशियां हैं जिनके अपने -अपने राशि स्वामी हैं l प्रत्येक ग्रह इन 12 राशियों में भ्रमण करता रहता है l  शनि की 2 राशियां है मकर और कुंभ जिनका अधिपत्य शनि के पास है l सौर मंडल में शनि धीमी गति से चलने वाला ग्रह है इसलिए इसका एक नाम मंद भी है l शनि एक राशि पर ढाई साल रहता है ,वह इतना प्रभावशाली ग्रह है जिस राशि पर रहता है उसके आगे और पीछे की राशि को भी प्रभावित करता है ,अतः यह एक राशि को साढ़े सात वर्ष  तक प्रभावित करता है l यही शनि की साढ़ेसाती या बड़ी पनौती कहलाती है l यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में जन्म राशि से द्वादश भाव में या जन्म राशि में या जन्म राशि से दूसरे भाव में शनि हो तो जातक को शनि की साढ़ेसाती आती है l

शनि की ढैया -  किसी जातक की जन्म कुंडली में जन्म राशि से चौथे या आठवें भाव में शनि हो तो उसे शनि की ढैया कहते हैं, अर्थात शनि ढाई वर्ष तक अपना दुष्प्रभाव डालेगा l

शनि की शांति के उपाय -  

(1) प्रतिदिन दो रोटी बनाकर उसमें तेल लगाकर एक रोटी गाय को तथा एक रोटी काले कुत्ते को खिलाएं l 

(२) शनिवार के दिन सुबह पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाएं तथा शाम को सरसों के तेल का दीपक पीपल वृक्ष के नीचे लगाएं l

(३) शनि स्त्रोत, शनि चालीसा के साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें l

(४)  शनिवार को शनि मंदिर में शनि देव की मूर्ति की सरसों का तेल, काले तिल मिलाकर चढ़ाएं, हनुमान जी को चोला चढ़ाएं l   

(५) काले तिल, काला कपड़ा, छाता, कील, कोयला आदि का दान करें l

(६)  प्रतिदिन सुबह-शाम शनि मंत्र ओम शं शनैश्चराय नमः का 108 बार जाप करें, भगवान शंकर और भगवान श्रीकृष्ण की आराधना भी शनि की महादशा ,साढ़ेसाती और ढैय्या में विशेष लाभ पहुंचाती है l 

 
 
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