- Written by Jitendra Singh Rajput
अक्षय तृतीया को एक अबूझ मुहूर्त माना गया है l जिसका कारण है दो प्रमुख ग्रहों का अपनी उच्च राशि में होना l पहला ग्रह सूर्य जो कि ग्रहों का स्वामी और उनका केंद्र भी है l दूसरा ग्रह चंद्रमा जो कि मन का स्वामी है और जिसका प्रभाव प्रत्यक्ष और तुरंत परिणामों को प्रभावित करता है l जिस तरह सोमवार या शनिवार को अमावस्या आने से उसका महत्व स्वतः ही बढ़ जाता है l उसी प्रकार बुधवार या शुक्रवार को अक्षय तृतीया पढ़ने से इसका महत्व बढ़ जाता है l इस दिन महालक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए उनका पूजन किया जाना चाहिए l लाल चंदन, सिंदूर, रोली, चावल, कमलगट्टे के बीज, कमलपुष्प, नाड़ा, धूप, शुद्ध घी का दीपक, दूध से बने पदार्थ या मिठाई इत्यादि लेकर महालक्ष्मी जी की कृपा प्राप्ति हेतु पूजन करें और अपने परिवार में सुख-संपत्ति, धन, यश, वैभव, समृद्धि की प्राप्ति तथा रोग व दरिद्रता से मुक्ति हेतु प्रार्थना करें l ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का 51 माला जाप करें, तत्पश्चात कपूर से आरती कर पुष्पांजलि देवें l जप निवेदन कर पूजन में हुई भूल चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें l अक्षय तृतीया के दिन दान का भी विशेष महत्व है l किसी मंदिर में मिट्टी का मटका जल भरकर दान करें l चावल, सत्तू, अनाज, खरबूज, पंखा आदि का दान करें l गर्मी को देखते हुए जरूरतमंद लोगों को छाता चप्पल आदि का दान अवश्य करें l |
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Written by Jitendra Singh Rajput
District: Hoshangabad
State: Madhya Pradesh