दिन विशेष - शुक्रवार
  • Written by Jitendra Singh Rajput

शुक्र को शुभ ग्रह की संज्ञा दी गई है l काल पुरुष के गुह्य स्थान पर शुक्र का अधिकार बताया गया है l जो कामवासना का प्रतीक है l शुक्र श्वेत  रंग का है l जो अग्नि कोण का स्वामी है l शुक्र सजल ग्रह है l शुक्र का वर्ण ब्राह्मण है और यह रजोगुण प्रधान हैl  शुक्र खट्टे रस का स्वामी है l ज्योतिष में शुक्र को प्रोढ़ बताया गया है l शुक्र को पक्ष का अधिपति कहा गया है l शुक्र की दृष्टि तिरछी है l शुक्र देखने में सुंदर, सर्वदा सुखी, काले सघन केश ,सुंदर नेत्र एवं वात ,कफ प्रधान प्रकृति वाला है l आभूषण, वाहन सुख, कामवासना, व्यापार आदि का विचार इसकी जन्मकुंडली में स्थिति से किया जाता है l शुक्र स्त्री भाव का कारक ग्रह है l ज्योतिष में शुक्र को मंत्री का पद प्राप्त है l शुक्र वृषभ और तुला राशि का स्वामी है l शुक्र मीन राशि में उच्च का तथा कन्या राशि में नीच का होता है l शुक्र पितृलोक का अधिपति है l इसे भ्रगु, काम, देत्यपूज्य, कविकाण,  देत्यगुरु , भार्गव, सित, उशना आदि नामों से भी जाना जाता है l नैसर्गिक ग्रह मैत्री के अनुसार शुक्र के मित्र ग्रह बुध और शनि है ,मंगल एवं बृहस्पति के साथ समभाव  है तथा सूर्य और चंद्रमा शुक्र के शत्रु ग्रह हैं l शुक्र की पीड़ा से वीर्य विकार, स्त्री सुख की हानि, धर्म की हानि,आदि कष्ट होते हैं l इसके मंत्र की जप संख्या 16 हजार है उसे विधिवत जपकर यदि शुक्र यंत्र को धारण किया जाए तो रोग एवं कष्ट दूर होते हैं l

शुक्र मंत्र - ओम शुं  शुक्राय नमः

शुक्र रत्न- हीरा वैकल्पिक रत्न - सफेद हकीक धातु - चांदी धारण दिन - शुक्रवार समय - प्रातः अंगुली- अनामिका

शुक्र दान - सफेद पूल, सफेद कपड़ा, चावल, चांदी, हीरा, सोना, दही, शक्कर, भूमि, सफेद गाय, भूमि, सफेद घोड़ा ,सफेद चंदन आदि

 
 
    IndiaTezNEWS24
    District: Hoshangabad
    State: Madhya Pradesh

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